औरत के दिल का मर्म – मेरी कलम से | Hindi Poem by Tripti Srivastava 7

औरत के दिल का मर्म – मेरी कलम से कभी तो यारों उसका दिल भी, टटोल कर के देखो। उसके दफ़्न जज्बातों को, कभी खोल कर तो देखो।। स्वजनों के …

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