Somvati Amavasya 2022: सोमवती अमावस्या जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और व्रत कथा,

दोस्तों, आज मैं आपसे Somvati Amavasya के महत्व के बारे में बात करने वाली हूँ । अगर आप Somvati Amavasya (सोमवती अमावस्या) के बारे में जानना चाहते हैं कि सोमवती अमावस्या कब है? तो आज की इस पोस्ट में मैं Somvati Amavasya Puja Vidhi के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाली हूँ। इसलिए कृपया पूरी पोस्ट को ध्यान से पढें।

Somvati Amavasya 2022

Contents.....

हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है. सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सुहागिनें व्रत रखती है और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती है।

जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ रही है, इसलिए ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि सोमवती अमावस्या 2022 है।

Somvati Amavasya

सोमवती अमावस्या का महत्व

हिंदू धार्मिक ग्रंथों में सोमवती अमावस्या का बेहद खास महत्व बताया गया है. सोमवार का दिन भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित माना गया है. इस दिन भगवान शिव सहित मां पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा अवश्य करें।

सोमवती अमावस्या के दिन किए गए दान का कई गुना फल मिलता है। मान्यता है कि किसी भी माह की अमावस्या को पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और स्नान-दान करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।  इसके अलावा इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करना शुभफल देने वाला होता है।

इसके अलावा सोमवती अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी के पूजन से जीवन में आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा से व्रत रखकर पूजा-पाठ आदि करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इसी दिन शनिदेव जी का भी जन्म हुआ था। इस साल इस दिन वट सावित्री पूजा भी है। इसके अलावा सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग व सुकर्मा योग भी बन रहा है। ऐसा संयोग करीब 30 साल बाद बन रहा है।

 

सोमवती अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

 

सोमवती अमावस्या की तिथि – 30 मई 2022, सोमवार

 

अमावस्या तिथि आरंभ29 मई 2022, दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से

 

अमावस्या तिथि समाप्त30 मई 2022, शाम 04 बजकर 59 मिनट तक

 

अभिजीत मुहूर्त30 मई 2022, सुबह 11 बजकर 57 मिनट से

दोपहर12 बजकर 50 मिनट से

सर्वार्थ सिद्धि योग31 मई 2022, सुबह 07 बजकर 12 मिनट से

शाम 05 बजकर 24 मिनट तक

 

सोमवती अमावस्या 2022 अशुभ मुहूर्त-

राहुकाल- 30 मई 2022, सुबह 07 बजकर 08 मिनट से सुबह 08 बजकर 51 मिनट तक

 

सोमवती अमावस्या की पूजन सामग्री

पुष्प, माला ,अक्षत, चंदन कलश, घी, धूप, रोली, भोग के लिए मिठाई, धागा, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, पान के पत्ते और 108 की संख्या में मूंगफली

 

सोमवती अमावस्या की पूजा विधि

 

  • सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें। या घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें।
  • इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
  • गायत्री मंत्र का पाठ करें।
  • इसके बाद भगवान शिव की पूजा करें।
  • सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं पीपल के पेड़ के पास आकर सिंदूर रोली और चंदन लगाकर उसकी पूजा करती हैं।
  • लाल धागा बांध कर पीपल के चारों ओर परिक्रमा करती हैं।
  • अपने वैवाहिक जीवन के सुखमय होने की इच्छा से और पति के लंबी उम्र की लालसा से पीपल की पूजा करती हैं और भगवान भोलेनाथ से मंगल कामना करती हैं।
  • पितरों का तर्पण करें और उनके मोक्ष की कामना करें।
  • पूजा-पाठ के बाद किसी जरूरतमंद को भोजन और वस्त्र का दान करें।
  • इस दिन विधि विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करें।
  • साथ ही इस दिन दान -पुण्य भी करना चाहिए।
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Somvati Amavasya

 

सोमवती अमावस्या पर क्या करें?

 

  • सुहागिनों के लिए तो सोमवती अमावस्या व्रत का खास ही महत्व रखता है। कहते हैं कि इस दिन शिव-पार्वती की पूजा और व्रत करने से सुहाग की आयु लंबी होती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन में स्नेह और सद्भाव बढ़ाने के लिए भी सुहागिनों को अमावस्या का व्रत पूजा करना चाहिए।
  • जिनकी कुंडली में चंद्र कमजोर है तो वह सोमवती अमावस्या के दिन गाय को दही और चावल खिलाएं। इससे कुंडली में चंद्र दोष कम होता है।
  • सोमवती अमावस्या पर शनि जयंती का संयोग भी बना हुआ है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की पूजा करना लाभकारी रहेगा। शनि दोष से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ के नीचे सरसों का तेल का दीपक जलाएं और ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जप करें।
  • सोमवती अमावस्या के दिन अन्न और शनि से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए। आप अपनी श्रद्धा अनुसार चावल, उड़द दाल, काले वस्त्र, काले चने, नमक, काल तिल का दान कर सकते हैं।
  • इस दिन महिलाएं तुलसी (Tulsi) की परिक्रमा करती हैं. साथ ही, वे तुलसी की परिक्रमा करते हुए अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.
  • जिनके माता या पिता परलोक चले गए हैं, उन्हें सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान करते हुए जल में तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर तिल जल अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि अमावस्या के दिन व्रत, पूजन और पितरों को जल तिल देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

 

सोमवती अमावस्या के दिन पितृदोष से मुक्ति के लिए करें ये उपाय-

 

  • अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करना भी शुभ माना जाता है। पितरों की शांति के लिए इस दिन आप स्नान-दान, तर्पण, श्राद्ध आदि कर सकते हैं। इस दिन व्रत के साथ पितरों को जल और तिल चढ़ाने की भी परंपरा है। ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • सोमवती अमावस्या के दिन ही पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है महाभारत काल से ही सोमवती अमावस्या पर तीर्थस्थलों पर पिंडदान का विशेष महत्व है।
  • सोमवती अमावस्या के दिन शनि और चंद्र का दान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इस दिन हनुमान जी, शनिदेव, भगवान विष्णु और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। अगर नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • सोमवती अमावस्या के दिन पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए बरगद के वृक्ष को जल चढ़ाकर परिक्रमा की जाती है।
  • सोमवती अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए गरीबों को पानी का घड़ा, ककड़ी, खीरा, छाता आदि का दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

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सोमवती अमावस्या के दिन सुख-समृद्धि के लिए उपाय 

 

  • अपने करियर को एक नई दिशा देने के लिये इस दिन एक पानी वाला नारियल लें और उस पर लाल रंग का धागा सात बार लपेटकर अपने ईष्ट देव का ध्यान करते हुए बहते पानी में प्रवाहित कर दें।
  • अगर आप बेरोजगारी की समस्या से परेशान हैं या आपको लगता है कि आपका कोई सीनियर आपके प्रमोशन में बाधा बन रहा है, तो इस दिन शाम के समय एक नींबू लेकर, उसके चार अलग-अलग टुकड़े कर दें और किसी चौराहे पर जाकर चुपचाप चारों दिशाओं में एक-एक नींबू का टुकड़ा फेंक दें।
  • अगर खूब मेहनत के बावजूद भी आपको पैसों के मामले में सफलता प्राप्त नहीं हो रही है, तो इस दिन आपको स्नान आदि के बाद विधि-पूर्वक धूप-दीप आदि से देवी मां की पूजा करनी चाहिए और उसके बाद देवी मां का ध्यान करते हुए चावल से हवन करना चाहिए।
  • अगर आपकी कोई खास इच्छा है, जो बहुत समय से पूरी नहीं हो पा रही है तो एक नारियल लेकर उसे देवी मां का नाम लेकर तोड़ दें। अन्दर से प्राप्त गिरी के 42 टुकड़े करें। 3 टुकड़े भगवान शंकर को चढ़ायें, 9 टुकड़ें छोटी कन्याओं को बांट दें। 2 टुकड़े दर्जी को, 2 टुकड़े माली को, 2 टुकड़े कुम्हार को प्रसाद के रूप में बांट दें और 4 टुकड़े अपने लिये रख कर शेष 20 टुकड़े मन्दिर में चढ़ा दें या प्रसाद के रूप में बांट दें।
  • यदि आपके घर में कोई सदस्य कुछ दिनों से बीमार चल रहा है या फिर आप खुद बीमार हैं तो सोमवती अमावस्या के दिन स्नान आदि के बाद बीमार व्यक्ति के पहने हुए कपड़े से एक धागा निकालें और उस धागे को रूई के साथ लपेटकर उसकी बत्ती बना लें। अब एक मिट्टी के दिये में सरसों का तेल डालकर, वह बाती लगा दें और हनुमान जी के मन्दिर के बाहर वह दीपक जला दें।
  • अपने परिवार से सारी परेशानियों को मिटाने के लिये और खुशियों को बरकरार रखने के लिये इस दिन 5 लाल फूल और 5 तेल के दीपक जलाकर बहते पानी में प्रवाहित कर दें । अगर ये उपाय आप शाम को दिन छिपने के बाद करें, तो और भी अच्छा है। बाकी आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं।

 

सोमवती अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये काम

आइए जानते हैं हिंदू धर्म के अनुसार सोमवती अमावस्या पर कौन से कार्यों को नहीं करना चाहिए :

 

Somvati Amavasya

  1. सोमवती अमावस्या के दिन किसी का भी अपमान या अनादर नहीं करना चाहिए और कड़वे शब्दों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए ।
  2. सोमवती अमावस्या के दिन मांस मदिरा का सेवन करने और नाखून अथवा बाल काटने की भी मनाही है।
  3. ज्योतिष अनुसार माना जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन भूलकर भी शमशान घाट नहीं जाना चाहिए।
  4. सोमवती अमावस्या के दिन देर तक बिल्कुल भी नहीं सोना चाहिए बल्कि सुबह जल्दी अर्थात ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।
  5. सोमवती अमावस्या के दिन शारीरिक संबंध भूलकर भी न बनाएं.
  6. इस खास दिन पर पीपल के पेड़ की पूजा का विधान है, परंतु पूजा के दौरान पेड़ को छूना शुभ नहीं माना जाता है।

 

सोमवती अमावस्या पर करें चमत्कारी मंत्रों का जाप

 

एकाग्रचित्त मन से विधि विधान पूर्वक अगर माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है तो इसके अनुकूल प्रभाव देखने को मिलते हैं. माता लक्ष्मी की कृपा से घर धन संपदा से परिपूर्ण हो जाता है।

सोमवती अमावस्या के दिन इन 10 चमत्कारी मंत्रों का जाप करना बहुत ही शुभ माना गया है.

 

  • ॐ लक्ष्मी नारायण नमो नम:
  • ॐ लक्ष्मी नम:
  • ॐ लक्ष्मी नमो नम:
  • ॐ लक्ष्मी नारायण नम:
  • ॐ नारायण नम:
  • ॐ नारायण नमो नम:
  • ॐ प्राप्ताय नम:
  • ॐ प्राप्ताय नमो नम:
  • ॐ धनाय नमो नम:
  • ॐ धनाय नम:

 

अमावस्या के दिन ये चीजें न खरीदें

 

जिस तरह हर काम को करने का शुभ-अशुभ मुहूर्त होता है, वैसे ही घर में कुछ खास चीजों को लाने का भी शुभ-अशुभ समय होता है.

 

  • भगवान के वस्‍त्र, पूजा का सामान गलती से भी अमावस्‍या के दिन न खरीदें. ऐसा करना आपको मुश्किल में डाल सकता है. अमावस्‍या के दिन खरीदी गईं ये चीजें भगवान को नाराज करती हैं.
  • यदि अमावस्या के दिन झाड़ू खरीदी जाए तो मां लक्ष्‍मी नाराज हो जाती हैं और घर में रखा पैसा भी बर्बाद हो जाता है. लिहाजा आर्थिक स्थिति की मजबूती चाहते हैं तो कभी भी अमावस्‍या के दिन झाड़ू न खरीदें.
  • धर्म-शास्‍त्रों के मुताबिक अमावस्‍या के दिन शराब-नॉनवेज खरीदना या इनका सेवन करना पितरों को नाराज करता है और जिंदगी में नकारात्‍मकता लाता है. ये काम शनि को भी नाराज करते हैं.
  • जिस तरह शनिवार के दिन तेल खरीदने और लगाने से बचना चाहिए. उसी तरह अमावस्‍या को भी तेल नहीं लगाना चाहिए. हालांकि इस दिन जरूरतमंदों को तेल का दान करना शुभ होता है.
  • अमावस्‍या के दिन अनाज या आटा खरीदना भी अशुभ होता है. ऐसा करना पूर्वजों की नाराजगी का कारण बनता है.

 

Somvati Amavasya Vrat Katha:

 

सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है और साथ ही व्रत कथा (Vrat Katha)  का पाठ भी किया जाता है. भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त इस कथा का पाठ करते हैं।

सोमवती अमावस्या की व्रत कथा

एक ब्राह्मण का भरा पूरा परिवार था। उसकी एक बेटी थी जिसकी शादी को लेकर वह बहुत चिंतित रहता था।  वह लड़की सुंदर, सुशील और कामकाज में कुशल थी, लेकिन उसकी शादी नहीं हो पा रही थी।

एक बार उस ब्राह्मण के घर एक साधू महाराज पधारे।  वे उस लड़की की सेवा से प्रसन्न हुए और उसे दीर्घायु का आशीर्वाद दिया।  फिर उसके पिता ने उन्हें बताया कि इसकी शादी नहीं हो रही है।  साधू ने लड़की के बारे में कहा कि उसकी कुंडली में शादी का योग नहीं है।

साधू महाराज की इस बात को सुनकर ब्राह्मण घबराकर उपाय पूछने लगा। तब साधू ने सोच-विचार करते हुए बताया कि दूर गांव में एक पतिव्रता धोबिन है।  अपनी बेटी को उसकी सेवा के लिए उसके पास भेजो।  जब वो पतिव्रता धोबिन अपनी मांग का सिंदूर तुम्हारी बेटी को लगाएगी तो तुम्हारी बेटी का जीवन भी संवर जाएगा।

 

सोमवती अमावस्या व्रत

 

ब्राह्मण ने अगली ही सुबह अपनी बेटी को धोबिन के घर भेज दिया। धोबिन अपने बेटे और बहु के साथ रहती थी।  ब्राह्मण की बेटी सुबह जल्दी जाकर घर के सारे काम कर आती थी। ऐसा दो-तीन दिनों तक चलता रहा।

धोबिन को लगा कि उसकी बहु सुबह जल्दी काम कर पूरा कर लेती है। उसने अपनी बहू से पूछा। तब बहु ने कहा कि मुझे लगा आप ये काम करती हैं। धोबिन ने अगली सुबह उठकर छिपकर देखा कि ऐसा कौन करता है। तब ब्राह्मण की बेटी वहां आई और फिर धोबिन ने उसे पकड़ लिया। धोबिन के पूछने पर उसने अपनी सारी व्यथा सुना दी।

धोबिन भी खुश हुई और उसे अपनी मांग का सिंदूर लगा दिया। ऐसा करते ही धोबिन के पति ने प्राण त्याग दिए। ये सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) का दिन था. धोबिन तुरंत दौड़ते-दौड़ते पीपल के पेड़ के पास गई। परिक्रमा करने के लिए उसके कोई समान नहीं था, तो उसने ईंट के टुकड़ों से पीपल (Peepal) की 108 बार परिक्रमा की। ऐसा करते ही धोबिन के पति में जान आ गई।

कुछ समय बाद ब्राह्मण की कन्या का अच्छी जगह विवाह हो गया और वह अपने पति के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करने लगी। उसी के बाद से सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) के दिन का प्रत्येक विवाहिता के जीवन में विशेष महत्व है। वे अपने पति की लम्बी आयु के लिए प्राथना करती है।

 

(Disclaimer: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी की विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’)

 

FAQ – Somvati Amavasya Puja

 

पीपल के पेड़ में कौन से देवता का वास होता है?

पीपल के पेड़ के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास बताया गया है. स्कंद पुराण में कहा गया है कि पीपल के मूल में विष्णु, तनों में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत भगवान निवास करते हैं.

क्या अमावस्या के दिन बाल कटवा सकते हैं?

अमावस्या के दिन बाल, नाखून और दाढ़ी नहीं काटनी चाहिए. शास्त्रों मे इन चीजों को करना अशुभ माना गया है.

पीपल में जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए?

यदि रविवार के दिन पीपल के पेड़ पर कोई जल चढ़ाता है तो उसके जीवन में कंगाली आ जाती है. इसलिए रविवार के दिन कभी भी पीपल के पेड़ पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए.

by Tripti Srivastava
मेरा नाम तृप्ति श्रीवास्तव है। मैं इस वेबसाइट की Verified Owner हूँ। मैं न्यूमरोलॉजिस्ट, ज्योतिषी और वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ हूँ। मैंने रिसर्च करके बहुत ही आसान शब्दों में जानकारी देने की कोशिश की है। मेरा मुख्य उद्देश्य लोगों को सच्ची सलाह और मार्गदर्शन से खुशी प्रदान करना है।

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